सोशल सेल्फी--- असूरक्षा की


नमस्कार दोस्तो आज का मुद्दा है भारत देश मे क्या वाकई अल्पसंख्यक डर के माहौल मे जी रहे है या उनको डराया जा रहा है। ये बाते इस लिये आज मुद्दा है क्यो की हमारे उप राष्ट्रपति जी ने जाते --जाते ये बाते बोली है। अब तो वो उपराष्टपति नही रहे शायद उनको पद पर रहते हुए ये बात खुल के बोलनी  चाहिये थी तो बात कुछ और होती।पर उनका चुनाव पद से रिटायर होते हुऐ उनको बोलना खुल के उचित लगा खैर ये तो उनका चयन था।



बवाल क्यों बोलने पर-

भारत मे अल्पसंख्यक को डर लगता है ये एक उपराष्ट्रपति बोल के जाये तो देश की छवि खराब होती है अंतरराष्ट्रीय मंचो पर भारत ये एक मुद्दा हो सकता है बवाल का और भी कारण है पर हम उसपर न जाके आगे बात करते है।

डर क्यों अल्पसंख्यकों -

हम आखिर के 3सालो मे सुन रहे है कि गौ रक्षा के नाम पर अल्पसंख्यक एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है कुछ राज्यो मे गौ हत्या बैन है तो वहाँ ऐसी घटना ज़्यादा देखने को मिल रही है शायद ये एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है अल्पसंख्यकों के असूरक्षा का जो पूर्व राष्ट्पति बोलना चाहते हो।
गाय हिंदुओं के लिये पूजनीय है गाय को हिन्दू धर्म मे माँ की संज्ञा दी गयी है। हिन्दू उनको पूजते है गाय आस्था की केन्द्र है। हिंदु समय-समय पर गाय हत्या पर बैन लगवाना  चाहता था. यूपी मे योगी जी सरकार बनी तो  सरकार  ने तुरंत गाय के कत्लखानो को बंद करने का आदेश दिया। और इस का अमल भी बहुत तेज़ हुआ। पर जिन के पास गाय थी जब वो उसको दूसरे राज्य को बेचने निकले जहाँ गाय को बेचना और काटना बैन नही था तो कुछ शरारती तत्वों ने उनको  हिन्दू धर्म का देकेदार बता के पिट दिया।

यहाँ यूपी से गाय के रक्षा के नाम पर जो विशेष समुदाय को पीटना और उनके काम को ले के डरना शुरू किया और यही से पूरे देश मे यही घटना क्रम जो शुरू हुआ क्या कर्नाटक, कश्मीर ,बिहार हो और  भी बहुत से है  मैं उस पर नही जाऊँगा ये बोलूंगा की शायद यही वो घटनाक्र हुए जो अल्पसंख्यकों के डर का कारण हो सकते है।




क्या पहेले ऐसा नही हुआ-


एक बात गौर करने वाली है हर समय एक सा  नही होता समय चलता जाता है 1984 इन्द्रिरा जी का काल इस का जीता जागता उदाहरण है सिक्ख  भी उस समय डरे होंगे  पर आज देखिये देश का अभिन्न अंग है। सेना मे सबसे ज्यादा सिक्ख  सैनिक ही होते है।

राजनीति ही एक बड़ा कारण है हम सब को लड़वाने का किसी समुदाय को  कुछ ज्यादा खुश करने के कारण ही ऐसी असुरक्षा की भवना घर करती है। पर ज्यादा  समय तक नही रह सकती क्योंकि हम सभी भारतीय है हम को एक रहना बचपन से सिखया जाता है  अंत मै हम को मिलना है ही है साथ

देश की संस्कृति -


हमारे देश की संस्कृति बड़ी ही कमाल की है ये सिर्फ मिल के रहना ही हम को सीखती है
समय कोई भी हो  हम लड़ के भी मिलना जानते है। राजनेताओ की चाल पहचानते है हिन्दू हो या मुस्लिम सिख हो या ईसाई सब को एक ले के चलने की आदत हमारे DNA मैं है

कुछ मुद्दों को विरोधी पार्टी ज्यादा तूल  देती है अपने वोट बैंक के कारण क्योकि वो अपने पार्टी को उस समुदाय करीब देखना चाहती पर उनका सिर्फ एक ही मकसद होता है अपनी पार्टी को वोट बैंक को बना सके। 
ये बात हम आम भारतीय समझते है हम को आपस मै लड़ के नफरत की बात कर के खुद का ही नुकसान कर रहे है पर ये सब नेता  नही समझते वो जहर उगल के डर  का माहौल बनाने मै  बहुत अच्छी भूमिका निभाते है 

ऐसा देश है मेरा ---

मारा देश बहुत से नफरतो से निकल के बढ़ता रहा है और आगे भी बढ़ता रहेगा और ये मुनकिन हुआ है हमारे आम भारतीयो के  सूझबूझ और आपसी भाईचारे से। 
आपसी भाईचारा ही हमारी पूंजी है राजनीति पार्टिया आती जाती रहेगी पर आपसी समझ  भारतीयों की हमेशा बनी  रहेगी तो ये डर हमेशा के लिए खत्म हो जायेगा। 

 जय हिन्द 
जय भारतीय 

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