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जनवरी, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तैयारी चुनाव की 2019 - पार्ट-2

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नमस्कार दोस्तो चुनाव की तैयारी 2019 श्रखला के नये अंक मे हम फिर आपके साथ चुनाव की चर्चा लेकर फिर हाजिर हुआ हूं। चलिये चर्चा शुरू करते है। चुनाव का त्यौहार आने वाला है ये त्यौहार बहुत बड़ा होता है क्योंकि यह त्यौहार 5 साल बाद आता है "आम चुनाव"  जो भारत की जनता को कुछ समय के लिये खास बना देती है। हम अपने पिछले आर्टिकल पर बात चुके है कि चुनाव एक पार्टी Vs सभी विपक्ष पार्टियों के बीच एक अनोखा चुनाव का युद्ध होगा। मैं आप सभी को कुछ याद दिलाना चाहता हूँ कि जब हम अपने बचपन मे जाते है तो हमको एक बात याद आती है जो हम सभी ने अपनी किताबो मे पढ़ी थी वो थी   "चाणक्य नीति"   चाणक्य नीति कहती है कि अगर सभी विपक्ष एक साथ मिल जाये तो समझ लेना चाहिये हमारा राजा अच्छा है। ऐसा कुछ फिल्मों मे भी हम देखते आ रहे है एक मूवी थी "नायक"जहाँ सभी विरोधी पार्टिया हीरो के अच्छे कामो से तंग आकर एक हो जाती है। ये सब बातें मे इस लिये आपके सामने रख रहा हूँ कि ये सब कुछ बचपन से जवानी तक देख और सुन रहे है। इसका प्रभाव हम सभी के दिमाग पर रहता है। साथ ही इसका प्रभाव जरूर इस बार 2019 चुनाव ...

चुनाव की तैयारी!2019

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नमस्कार दोस्ती आज मौका है कि कुछ अपने देश के पॉलिटिकल माहौल पर कुछ लिखू। काफी समय बीत गया मुझे पॉलिटिक्स पर कुछ लिखे हुए। माहौल तो तब भी लिखने का था पर 2019 के करीब आकर के इस हो रही राजनीति पर लिखने का मजा ही कुछ और है। जनवरी जाते-जाते और फरवरी आते हम देख रहे है कि जहाँ एक तरफ गठबंधन हो रहे है और दूसरी तरफ सत्ता पक्ष इस गठबंधन को ठग बंधन की संज्ञा दे रहा है। सत्ता पक्ष का इस गठबंधन पर एक तर्क यह भी है कि कौन होगा इस गठबंधन का प्रधानमंत्री पद का चेहरा । पर हमको यह नही भूलना चाहिये कि सत्ता पक्ष ने भी तो गठबंधन किया था 2014 मे और 2017 यूपी चुनाव मे यहाँ तक कि 2017 मे तो यूपी का CM चेहरा तक बीजेपी ने नही दिया था। तो बीजेपी आज क्यों सभी दलों के गठबंधन का प्रधानमंत्री चेहरा कौन होगा ये मुद्दा उठा रही है। सोचना तो होगा हम सभी को.... आम चुनाव की तैयारी  शुरू हो गयी है पर इस बार आम चुनाव "आम चुनाव" न रहकर "खास चुनाव" रहेगा। आप ये प्रश्न पूछेगे की क्यों तो मेरा जवाब होगा कि बहुत समय बाद एक पार्टी के विरुद्ध बहुत सी पार्टिया एक साथ मिल कर चुनाव लड़ने जा रहे है। ऐसा ...

बनारस- संस्कृति और आधुनिकता का मेल

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बनारस के घाट पर बैठो तो ऐसा अहसास होता है कि सारी दुनिया यही ठहरी है। दोस्तो मैं हूँ " सूरज जी आज बहुत समय बाद आपसे फिर अपने आर्टिकल के माध्यम से मिलना हुआ है। आज ये आर्टिकल मैं बनारस के घाट पर बैठ कर लिख रहा हूँ।'' मुझे ये आर्टिकल लिखते हुए ऐसा महसूस होता है कि ये आर्टिकल मैं सिर्फ बनारस के घाट पर ही लिख सकता हूँ। ऐसा इसलिय मैं बोल रहा हूँ कि आपको ये एहसास मैं शब्दो मे बयान नही कर सकता हूँ। आपको बनारस के घाट की खूबसूरती यहाँ आकर ही देखनी होगी। आपको यहाँ से जुड़ाव हो जायेगा। आप बनारस बार - बार आना चाहे।  मैं जब भी बनारस रहता हूँ। बनारस के घाटों की खूबसूरती देखने जरूर देखने जरूर आता हूँ। बहुत ही सुकून मिलता है मुझे। घण्टो घाटो पर बैठ कर घाटो और उनकी गतिविधियों को बारीकी से निहारत हूँ। मन को बहुत ही शन्ति मिलती है। और उस शांत मन से अपने साथ लाये उन कोरो पन्नो को भरता हूँ। दिल और दिमाग मे मची हलचल को शब्दों के माध्यम से पन्नो पर उतारने को मुझे विवश करता है। और जो भी शब्द उन पन्नो पर उभरता है वह मेरे मन के शब्द है जो माँ गंगा के लहरो की तरह बहती है कल -क...