संदेश

मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Roti bank varanasi कैसे बनी जाने पूरी कहानी। रोटी बैंक काम कैसे करती है

चित्र
दोस्तो आज की कहानी है roti bank varanasi जिसकी कहानी आज आप इस artical  मे पढ़ने वाले है।  दोस्तो रोटी बैंक का नाम तो खूब सुना होगा चलिये इसके बनने की कहानी आज हम आपको बताते है। रोटी बैंक वाराणसी को रचने का पूरा श्रेर्य किशोर कांत तिवारी और उनके मित्रो को जाता है। आज रोटी बैंक 25 शहरो और 6 राज्यों से जुड़ चुका है। और वहाँ रोटी बैंक अपना काम कर रही है। Roti bank के founder कौन है - रोटी बैंक के founder&President श्री किशोर कांत तिवारी जी है जो 30 साल के है साथ ही ग्रेजुएशन कर चुके है Diploma and sefty  किया है हैदराबाद मे जॉब कर चुके है। अब रोटी बैंक को बनाकर अपनी सेवा दे रहे है।   रोटी बैंक  बनाने की सोच कैसे आयी - 2017 मे roti bank बनाने का ख्याल किशोर जी के मन मे जन्म ले चुका था। क्योंकि किशोर जी एक दिन  बनारस घाट पर घूम रहे थे तभी किशोर जी ने देखा कि एक भूखा आदमी कचरे के ढेर से लोगो के फेके खाने को बीनकर खा रहा था। किशोर जी को यह दृश्य देख दिल झकझोर गया।  किशोर जी ने उस आदमी को कूड़े से बीनकर खाना खाते हुए बहुत लोग आते- जाते देख...

प्रवासी मजदूरों का पलायन क्यों हुआ एक सफर तो जान ले ?

चित्र
जब से भारत मे लॉक डाउन शरू हुआ उसके साथ ही कोरोना वायरस के प्रकोप के साथ बेरोजगारी, पलायन,भूखमरी,हिंसा का भी प्रकोप भारत झेल रहा है। Lockdown 1.0 से Lockdown 4.0 आते-आते लोगो का सब्र का बांध टूट गया है  वैसे भी बड़े शहरो मे जहाँ कोरोना का प्रकोप ज्यादा था। वहाँ से गरीब-मजदूर जान बचाकर बड़ी संख्या  मे  पलायन करने लगे। काम तो वैसे भी 2 महीने से बंद पड़ा था जैसे-तैसे भूखे-बेबस हमारे प्रवासी भाइयों और बहनों को थोड़ी बहुत सरकार वह NGO के सहारे 2 महीने तक आधा पेट भरते रहे। यहाँ एक बात आपको मनना होगा कि आज पूरे देश मे सामाजिक संस्थाओं वह NGO की भूमिका पूरे भारत मे भूखे को खाना खिलाने मे बहुत बड़ी रही है। यह बहुत ही बड़ी बात है  परंतु कब तक मजदूर आधा-अधूरा पेट खा कर और corona virus न हो उनके परिवार को उसके डर से पलायन करने को मजबूर हुए प्रवासी मजदूर । सबसे ज्यादा पलायन बड़े शहर महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान जो कोरोना के hotspot बने शहरों मे मजदूरों काम करने के दौरान लॉक डाउन अचानक से होने से फस गये। हॉटस्पॉट वाले शहरों के कारण सभी तरह की गतिविधियों पर...

क्या Coronavirus पूरी दुनिया को गरीब बना के छोड़ेगा ?

चित्र
कोरोनावायरस महामारी की वजह से पिछले दो महीने में 3.3 करोड़ से ज्यादा अमेरिकियों की नौकरी चली गई है. कोरोना की वजह से अमेरिका में आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और वर्ल्ड बैंक ने अमेरिका की वृद्धि दर नकारात्मक यानी शून्य से नीचे रहने का अनुमान जताया है.लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी दर रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है. क्रोना वायरस ने दुनिया के तमाम देशों को अपने आगे घुटने टेकने को मजबूर कर दिया है बात अर्थव्यवस्था की हो या नौकरियों की इस वक्त बुरा हाल है. कोई देश अपने नागरिकों और अपने देश के हित के लिए ही सोचेगा. अमेरिका ने H1B वर्क विजा पर रोक लगाने की कवायद तेज कर दी है. यह वीजा भारतीय आईटी पेशवरों के बीच खासा लोकप्रिय है. इसके साथ-साथ स्टूडेंट वीजा और काम करने की अनुमति पर भी अस्थायी रूप से रोक लगाने की तैयारी चल रही है. इस आदेश के तहत, नए अस्थायी, कार्य-आधारित वीजा जारी करने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है. इसमें कहा गया है कि H-2B वीजा पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है.इसके साथ-साथ स्टूडेंट वीजा और इन वीजा के साथ मिलने वाले कार्य अनुमति पर केंद्रित हो सकता है. ...

क्या सरकार ने नागरिकों से वसूली करके देश चलाने का सोच लिया है ?

चित्र
क्या सरकार ने नागरिकों से वसूली करके देश चलाने का सोच लिया है ? प्रवेश रवि चौहान (Times of जनता) 1.शराब पर 70% कोरोना टैक्स 2. मजदूरों से रेलवे द्वारा 15% किराया की वसूली 3. पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी 4. पीएम केयर फंड के पैसों का सरकार क्या करेगी,क्या बचा कर रखेगी ? पहले शराब पर राज्य की सरकारें 70 फ़ीसदी टैक्स लगा देती है यानी कि जो शराब 100 रुपए की होगी वह आपको 170 रू में मिलेगी. वह भी उस समय में जब पहले से लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. उनको और अतिरिक्त बोझ दे दिया गया है. दूसरा प्रवासी मजदूरों से रेलवे द्वारा टिकट का 15% रुपया वसूला जा रहा है समझ से बाहर है कि ऐसे समय में रेलवे को मात्र 15% रुपए वसूल कर क्या हासिल हो जाएगा.वह मजदूर तो खुद पहले से ही पैसों की तंगी का सामना कर रहे हैं इसमें मान लिजिए 100 रुपए की टिकट है. यात्री को टिकट का 15% यानी 15 रू देना है. तीसरा अपने आपको गरीबों का मसीहा कहने वाली बीजेपी सरकार डीजल पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क और बढ़ा देती है. वह भी ऐसे समय में जब लोग पहले से ही आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं कच्चे तेल ...