प्रवासी मजदूरों का पलायन क्यों हुआ एक सफर तो जान ले ?
जब से भारत मे लॉक डाउन शरू हुआ उसके साथ ही कोरोना वायरस के प्रकोप के साथ बेरोजगारी, पलायन,भूखमरी,हिंसा का भी प्रकोप भारत झेल रहा है।
सबसे ज्यादा पलायन बड़े शहर महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान जो कोरोना के hotspot बने शहरों मे मजदूरों काम करने के दौरान लॉक डाउन अचानक से होने से फस गये। हॉटस्पॉट वाले शहरों के कारण सभी तरह की गतिविधियों पर लगाम लग गया जिससे 2 महीने तक कोई काम नही तो पैसा भी नही बचा प्रवासी मजदूरों के पास उल्टा उनको वह उनके परिवार को corona न हो जाये इसके डर से इतनी बड़ी संख्या मे मजदूरों का ऐतिहासिक पलायन शरू हुआ ऊपर से केंद्र और राज्य सरकारों की बेरुखी का सामना करना पड़ा और अभी भी कर रहे है।
Lockdown 1.0 से Lockdown 4.0 आते-आते लोगो का सब्र का बांध टूट गया है
वैसे भी बड़े शहरो मे जहाँ कोरोना का प्रकोप ज्यादा था। वहाँ से गरीब-मजदूर जान बचाकर बड़ी संख्या
मे पलायन करने लगे। काम तो वैसे भी 2 महीने से बंद पड़ा था जैसे-तैसे भूखे-बेबस हमारे प्रवासी भाइयों और बहनों को थोड़ी बहुत सरकार वह NGO के सहारे 2 महीने तक आधा पेट भरते रहे। यहाँ एक बात आपको मनना होगा कि आज पूरे देश मे सामाजिक संस्थाओं वह NGO की भूमिका पूरे भारत मे भूखे को खाना खिलाने मे बहुत बड़ी रही है। यह बहुत ही बड़ी बात है
परंतु कब तक मजदूर आधा-अधूरा पेट खा कर और corona virus न हो उनके परिवार को उसके डर से पलायन करने को मजबूर हुए प्रवासी मजदूर ।
सबसे ज्यादा पलायन बड़े शहर महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, राजस्थान जो कोरोना के hotspot बने शहरों मे मजदूरों काम करने के दौरान लॉक डाउन अचानक से होने से फस गये। हॉटस्पॉट वाले शहरों के कारण सभी तरह की गतिविधियों पर लगाम लग गया जिससे 2 महीने तक कोई काम नही तो पैसा भी नही बचा प्रवासी मजदूरों के पास उल्टा उनको वह उनके परिवार को corona न हो जाये इसके डर से इतनी बड़ी संख्या मे मजदूरों का ऐतिहासिक पलायन शरू हुआ ऊपर से केंद्र और राज्य सरकारों की बेरुखी का सामना करना पड़ा और अभी भी कर रहे है।
सरकारों की लाल फीताशाही से मजदूरों परेशान हुए फिर खुद ही अपने घरों की तरफ पैदल,साइकिल, रिक्शा,ठेले,गाड़ी बुक करके अपने घर को निकल पड़े।
जितने भी प्रवासी मजदूर पलायन कर रहे है उनकी मजबूरी भी हमको समझनी होगी जिन बड़े शहरों मे छोटी खोली व कमरो मे रहते थे वहाँ social दूरी कैसे हो सकती है। तंग गालिया, एक ही टॉयलेट जिसको कई परिवार इस्तेमाल करते हो वहाँ corona फैलने का डर होना जायज है। ऐसे माहौल मे social दूरी नियम का पालन कैसे हो सकता है। एक बहुत बड़ा कारण यह भी पलायन का जो कि जायज भी है।
पलायन करने वाले मजदूरों को यह बात पता है खतरा है निकलने पर लेकिन परदेस मे मरने से अच्छा है कि घर पहुँच कर अपने लोगो के बीच अपने गाँव-देस मे दम तोड़े तो अच्छा होगा।


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