सोशल सेल्फी-- तीन तलाक को तलाक
नमस्कार दोस्तो आज हमारा मुद्दा है ट्रिपल तलाक जो नासूर था मुस्लिम महिलाओं के लिये। उसको कोर्ट ने पाबंदी लगा दी। ये बहुत ही ऐतिहासिक फैसला है मुस्लिम महिलाओं के लिये और उन सभी औरतो के लिये जो अपना सम्मान और हक के लिये संघर्ष करती है।
याचिकाकर्ता -
शायरबानो,फराह फैज़, आफरीन रहमान,इशरत जहाँ और गुलशन परवीन आप सभी एक मिसाल हो हर मुस्लिम महिलाओं के साथ-साथ हर उस महिलाओं की जो अपने अपने हक के लिये लड़ना चाहती है।तीन तलाक पर लड़ाई की शुरुवात
इसकी शुरुवात तो....जब 1978 मे इंदौर की शाहबानो ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।तभी से हो गयी थी पर इतना लम्बा सफर तय करना होगा ये कभी नही सोचा था
1978 से 2017 तक एक लंबा सफर तय किया है ट्रिपल तलाक को बैन करने के लिए मुस्लिम महिलाओं के हक और सम्मान को पाने मे।
ये जो लंबा सफर रहा ट्रिपल तलाक पर बैन करने का उसका पूरा श्रेय उन समय की सरकार को जाता है। जो हिम्मत नही कर सकी ट्रिपल तलाक पर मुस्लिम महिलाओं के साथ खड़ी हो सके।
उल्टा जब अदालत ने शाहबानो के हक मे फैसला सुनाया तो तत्कालीन सरकार ने संसद मे फैसला पलट दिया और (तलाक पर अधिकारों का सरंक्षण ) कानून-1986 लेकर आयी।
इसके जरिये सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए प्रवधान किया गया कि पति तलाक के बाद केवल इद्दत की मुद्दत ताल गुजर भत्ता देने को जवाबदेह है।
जबकि मघ्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 1 जुलाई1980 को प्रति माह 179 रुपये देने का आदेश दिया था शाहबानो को और यह तक शीर्ष अदालत तक ने भी यही फैसले को बरकरार रखा था।
परन्तु मुस्लिम समुदाय के विरोध के कारण सरकार डर गई और नया कानून ले आयी।
अब क्या बदलाव आयेगा--
अब बहुत बदलाव देखने को मिल सकता है क्योंकि अब मुस्लिम महिलाओं को लगेगा कि उनको इंसाफ मिल सकता है। वो अदालत आ सकती है अपने हक़ के लिये भरोसा होगा अदालत पर ज्यादा।
हलाल जैसे बेकार नियम जो कुछ लोग शरीयत के नाम पर चला रहे है वो बंद होगा ।
उल्टा इस्लाम और कुरान को बदनाम कर रहे है जो गलत है।
उल्टा इस्लाम और कुरान को बदनाम कर रहे है जो गलत है।
- वो सिर्फ अपना दुकान चला रहे है पैसे के लिये और बदनामी पूरी कौम की होती है और बदनामी सहीऔर नेक मौलानाओ की होती है।
- बराबरी का हक-- महिलाओं को भी पुरुषों के बराबर अधिकार मिलना उनका हक है। जो पुरुष प्रधान समाज ने काफी समय से रोक रखा है।
- अब ये पुरुष प्रधान समाज को तोड़ के एक समान समाज को बनाना होगा जहाँ पुरुष और महिलाओं को बराबरी का हक हो
- महिलाओं को वस्तु समझने की मानसिकता को मिटाना होगा और ये काम खुद महिलाये ही मिटा सकती है।
- अपनी शक्ति को दिखा के अपना हक ले के।
हर महिला को शिक्षा देना पहली प्राथमिकता होना चाहिए जिससे वो अपने पैरो आर्थिक रूप से खड़ी हो सके।समाज मे आये बदलाव को समझ सके ये सिर्फ शिक्षा ही कर सकता है।
दोस्तो हमेशा ध्यान रहे शिक्षा ही देश और समाज मे बदलाव ला सकती है।
हर कौम की तरकी शिक्षा पर ही निर्भर होती है मुख्य रूप से महिला शिक्षा से
थैंक्यू दोस्तो
जी हिन्द
जय भारतीय
जी हिन्द
जय भारतीय
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