सेल्फी सेल्यूट --- शहीद भगत सिंह The Real Hero
23 मार्च को हमारे देश के हीरो शहीद भगत सिंह जी को फाँसी दी गयी थी लाहौर की जेल मे 23 साल की अल्प आयु मे देश के नाम अपनी अपनी कुर्बानी दी और वो भी हँसते--- हँसते ये तो सिर्फ भारत मे ही हो सकता है।
भगत सिंह जी का देश भक्ति का ऐसा जुनून रखना हमारे भारतवर्ष की गौरव को बयान करता है।
यूथ आइकॉन --
भगत सिंह जी बचपन से मेरे हीरो रहे है मेरे पर्स मे उन के नाम का एक सिक्का है जो हमेशा मेरे पास रहता है जब भी अपना भरोसा खोता हूँ वो सिक्का मुझे नयी ऊर्जा मुझे देता है।
भगत सिंह जी ने जिस साहस से शाक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुकाबला किया ,वो आज के युवा के लिये बहुत बड़े आदर्श है। जैसे की मेरे भी.........
भगत सिंह ,राजगुरु ,सुखदेव जी को 23 मार्च के दिन शाम को 7 बज के 33 मिनट पर फाँसी पर चढ़ाया गया था वो हमारे लिये शहीद हुऐ। हमारे भविष्य के लिये हर एक भारतीय के लिये, ........ भगत सिंह ,राजगुरु ,सुखदेव जी वो सभी हमारे हीरो है और पूरी दुनिया के लिये एक बहुत बड़ी मिशाल।
क्या सीखे शहीद भगत सिंह जी से--
भगत सिंह जी और उन के दोनों साथी 2 साल जेल मे रहे। इस दौरान उन्होंने अपने लेक लिख कर अपने क्रांतिकारी विचारो को वक्त करते रहे। वो जेल मे रहते हुए अपना अध्ययन को भी बरकरार रखा ये बहुत बड़ी बात है दोस्तों वो जेल मे रहते हुए भी नही रुके। और हम लोग तो छोटी से छोटीपरेशानी आने पर अपनी लाइफ को रोक सा देते है। मरते हुए भी कैसे जिया जाता है ये हम सभी युवा को शहीद भगतसिंह जी से सीखना चाहिए
भगत सिंह जी मे जो आग थी उस बात का पता हम को जब चलता है जब उन के द्वारा लिखी इंगलिश बुक
''मै नास्तिक क्यों हूँ '' को पढ़ते है उस मे बताया गया है कैसे 64 दिन तक उन्होंने ने और उन के साथियों ने के मिलकर भूख हड़ताल की अपने हक वो भी जेल मे अपने हक के लिये जिस मे उन को अपने एक साथी यतीन्द्रनाथ दास जी की तो भूख से अपने प्राण ही चली गयी।
अपनी बात अहिंसा से कैसे रखनी वो ये बहुत अच्छी तरह जानते थे जब की वो हिंसा की ताकत भी रखते थे पर उन्होंने अहिंसा को चुना। यही होते है सच्चे हीरो मेरे दोस्तों।
मेरा रंग दे बसंती चोला।
मेरा रंग दे बसंती चोला। माया रंग दे बसंती चोला।
इसी गीत को गाते गाते वो फाँसी पर चढ़ने गये
आज 1923 से 2017 तक के सफर मे एक बात तो समान है वो कल भी हीरो थे हमारे और आज भी हीरो है हमारे और भविष्य मे भी रहने वाले है हमारी प्रेरणा बन के आये उन को दिल से नमन करे.
उन से कुछ नया करने और थोड़ा देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा ले
जय हिन्द
मेरा रंग दे बसंती चोला।
मेरा रंग दे बसंती चोला। माया रंग दे बसंती चोला।
इसी गीत को गाते गाते वो फाँसी पर चढ़ने गये
आज 1923 से 2017 तक के सफर मे एक बात तो समान है वो कल भी हीरो थे हमारे और आज भी हीरो है हमारे और भविष्य मे भी रहने वाले है हमारी प्रेरणा बन के आये उन को दिल से नमन करे.
उन से कुछ नया करने और थोड़ा देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा ले
जय हिन्द

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