सोशल सेल्फी-- ट्रेन से बुलेंट ट्रेन तक
नमस्कार दोस्तो आज हम सोशल सेल्फी मे लेकर आये है अपनी रेल की सुरक्षा व्यवस्था को हम पड़ताल करेगे की जो सपना मोदी जी ने "न्यू इंडिया" को लेकर बनाया है।वहाँ हमारी रेल व्यवस्था कहाँ फिट बैठती है। और ये भी की जो बुलेंट ट्रेन भारत मे चलने वाली है अहमदाबाद से मुम्बई तक के लिये क्या ये सही फैसला है सरकार का जब की हमारी रेल की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था बिल्कुल फेल है अभी 2017 तक भी। जो सरकार का सपना है ट्रेन से बुलेंट ट्रेन तक का बहुत ही काटो भरा है।
हमारी रेल व्यवस्था--
हमारी रेल की व्यवस्था ये है की आज तक वो उत्तम प्रकार की खान-पान तक ट्रेनों नही हो सकी है।
70 वर्ष हो चुके है भारत को अपनी रेल को सँभलते हुए ।पर आज भी वो दुनिया के हर उस देश से मिलो पीछे है जो विकसित देश है आज हम दावा करते है हम भी जल्दी ही विकसित देश बनाने वाले है।
चीन दुनिया की सबसे तेज रेल चलाने वाला है।
और अभी हम 200 km से ऊपर भी ठीक से ट्रेन नही चला पाये है। बुलेंट तो दूर का सपना लगता है।
आज भी हमारी रेल व्यवस्था गंदगी से जूझ रही है।
स्टेशनों पर सफाई नही दिखती क्योंकि कोई सफाई का मैनजमेंट ही नही है।
साफ पानी आप को नही मिलता सुरक्षा पूरी नही रहती ट्रेनों मे।
पिछले10 सालों मे कुछ बदलाओ जरूर आया है पर उतना नही की हम खुश हो सके।
पिछले10 सालों मे कुछ बदलाओ जरूर आया है पर उतना नही की हम खुश हो सके।
ट्रेन दुर्घटनाये-- इस अगस्त माह मे एक हफ्ते मे दो ट्रेन हादसे हुए जो हमारे रेलवे की कार्य व्यवस्था की कार्यशैली को उजागर करता है।
मुजफरनगर के खतौली के पास बेपटरी हुई उत्कल एक्सप्रेस हो।
जो एक बहुत बड़ी लापरवाही के कारण ये दुर्घटना घटित हुई। पटरी पर मरम्मत का काम चल रहा था।
और उसकी जानकारी अधिकारी जनो को न हो सकी जिस का खामियाजा आम लोगो को जान देके चुकानी पड़ी।
और उसकी जानकारी अधिकारी जनो को न हो सकी जिस का खामियाजा आम लोगो को जान देके चुकानी पड़ी।

ये कैसी कार्यशैली है हमारे रेलवे की.
ठीक 4 दिन बाद कानपुर-इटावा के बीच अछल्दा के पास पटरी पर पलटे डम्पर से टकराई दिल्ली जा रही ट्रैन कैफियात एक्सप्रेस । ये जानकारी की पटरी पर डम्पर है कौन देगा रेल कर्मी ही देगा ना.. न की जनता देगी रेलवे की तनख्वाह वो लेते काम करने के लिये न की आराम के लिये।
क्यों इतनी बड़ी लापरवाही हुए। इस का एक बहुत बड़ा कारण कामचोरी को भी जाता है जो हमारे देश के हर विभाग मे पूरी तरह व्याप्त है। सरकार से तनख्वाह लो और काम थोड़ा करो।
ट्रेनों की लेटलतीफी--
70 साल बाद भी हमारे देश मे ट्रेन टाइम पर नही चलती । ये देश और हर उस सरकार के लिये शर्म की बात है जो इन 70 सालो मे देश मे राज कर चुके है ।

मौसम की मार की काट तक हम इन 70 सालो मे नही निकल सके है।
सर्दी पड़ी तो कोहरे के कारण ट्रेन लेट बरसात हो तो बाढ़ के कारण ट्रैन लेट कोई रोड मैप तक नही बना सकी अभी तक सरकारे बस ये बोल पाती है कि काम चालू है इन सभी पर ...
मौसम की मार की काट तक हम इन 70 सालो मे नही निकल सके है।
सर्दी पड़ी तो कोहरे के कारण ट्रेन लेट बरसात हो तो बाढ़ के कारण ट्रैन लेट कोई रोड मैप तक नही बना सकी अभी तक सरकारे बस ये बोल पाती है कि काम चालू है इन सभी पर ...
साफसफाई--
रेलवे के स्टेशनों पर जाये तो टॉयलेट की सुविधा बहुत ही खराब और घटिया हालात मे मिलेगी।
इतनी गंदगी मिलेगी की आप को उल्टी हो जाये।
सफाई की जिम्मेदारी वहाँ तैनात रेलवे सफाई कर्मियों की है।पर काम बस 50%ही करते है।
गलती पूरी तरह उनकी नही उसको तैनात करने वाले उन अधिकारियों की है जो उनकी ड्यूटी लगाते पर अपने सफाई कर्मियों को मैनजमेंट नही सीखा पाते है।
क्योंकि वो खुद मैनजमेंट से कोसो दूर रहते है।
इतनी गंदगी मिलेगी की आप को उल्टी हो जाये।
सफाई की जिम्मेदारी वहाँ तैनात रेलवे सफाई कर्मियों की है।पर काम बस 50%ही करते है।
गलती पूरी तरह उनकी नही उसको तैनात करने वाले उन अधिकारियों की है जो उनकी ड्यूटी लगाते पर अपने सफाई कर्मियों को मैनजमेंट नही सीखा पाते है।
क्योंकि वो खुद मैनजमेंट से कोसो दूर रहते है।
- बस ड्यूटी लगा दो काम हो गया। वो सभी सफाई कर्मी थोड़ा साफ करेगे बस हो गया कोटा पूरा अब नेक्स्ट डे करेगे काम।
- यही रवैया हमारे हर सरकारी और खुद मे भी घर कर गयी है।
- इससे निकलना होगा हम को और रेलवे और सभी सरकारी विभागों को भी ।
- सरकार को अपने पुराने तरीके बदले होंगे और काम करवाने का तरीका भी।मैनेजमेंट करना खुद सरकार को आना चाहिये और मैनजमेंट सीखना भी सरकार का काम है।
- मैनजमेंट पर सरकार को काम करना होगा। यही सिर्फ रेलवे मे हमारी सुरक्षा की गारंटी बन सकती है
जय हिंद
जय भारत

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें