सोशल सेल्फी-- अर्जन सिंह पूरी बायोपिक स्टोरी


नमस्कार दोस्तो आज हम सोशल सेल्फी मे श्रधांजलि देगे हमारे वायुसेना के एक मात्र पांच सितारा मार्शल अर्जन सिंह जी को जो की 16 सितम्बर 2017 को  दुनिया को अलविदा कह गये।
हम आपको उनके जीवन के बारे मे कुछ जानकारी साझा करेंगे जिससे आप उनको और भी अच्छी तरह जान सके।

15 अप्रैल 1919 को पंजाब के लायलपुर (जो पाकिस्तान के फैसलाबाद मे है ) जन्म हुआ था। 1938 मे तत्कालीन ब्रिटिश राज मे रॉयल एयरफोर्स कॉर्नवल के लिए चुने गये। दिसम्बर 1939 मे आरएएफ कॉलेज मे स्नातक खत्म होने के बाद पायलट के रूप मे कमीशन मिला।
अर्जन सिंह जी 20 साल की आयु मे ही पायलट बन गये थे।

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सन 1944 मे दूसरे विश्वयुद्ध  मे अराकान अभियान के स्क्वाड्रन-1 का नेतृत्व भी किया। बतौर पायलट दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बतौर पायलट अपनी अपनी वीरता का प्रदर्शन भी किया था।
साथ ही दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अपने अरकान अभियान के लिए वह Distinguished Flying Cross (DFC) USA से नवाजे गए थे।

और  1945 मे भारतीय वायुसेना के एकजीविशन फ्लाइट के कमांडेड की भूमिका को निभाया था।
अर्जन सिंह चंद उन लोगो मे से थे, जो 1947 के बटवारें के बाद देश की वायु सेना की एक नवजात शिशु की तरह परवरिश की और उसको पाला पोसा।

अर्जन सिंह को 1964 मे एयर ऑफ एयर स्टाफ बनाया गया था। वह 1अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 चीफ ऑफ एयर स्टाफ पद पर रहे थे।

1965 की जंग मे अर्जन सिंह ने वायु सेना का नेतृत्व किया था। 1965 की जंग मे अभूतपूर्व पर्दशन करने के लिये उनको एयर चीफ मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया था।अर्जन सिंह जी अपने काम को लेकर बहुत ही जुनूनी थे
इसका अंदाज़ा एक किस्से से पता चलता है जब 1 सितम्बर 1965 को  तत्कालीन रक्षा मंत्री वायबी चव्हाण  ने पूछा था कि यदि सेना आपसे मदद मांगे तो आपकी वायुसेना कितने समय मे मदद दे सकती है तब अर्जन सिंह ने बोला हम एक घण्टे मे सेना को मदद दे सकते है पर लगता था कि वो एक घण्टे से भी संतुष्ट नही थे तभी  तो मात्र 26मिनट  मे ही सेना का पहला लड़ाकू विमान  तैयार कर पाकिस्तान के सेना के ऊपर  हमला करने के लिये उड़ान भर चुका था। ये था उनका जूनून काम और देश के प्रति।

1969 मे वायुसेना से रिटायर होने के बाद उन्होने अपने मुल्क की कई तह से सेवा की ।1971 मे वह स्विजरलैंड के राजदूत बनाये गये।1974 मे अफ्रीका देश केन्या के उच्चायुक्त की भूमिका निभाई। 1975 से 1985 तक राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य रहे।

दिसम्बर 1989 से दिसम्बर 1990 तक दिली के उपराज्यपाल रहे। मार्शल अर्जन सिंह जी को 60 तरह के विमानों को उड़ाने का अनुभव प्राप्त था।
मार्शल अर्जन सिंह जी बहुत ही जुझारू भी थे जब पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जी को दिल्ली एयरपोर्ट पर श्रधांजलि दी जा रही थी । तब अक्सर व्हीलचेयर पर दिखने वाले अर्जन सिंह जी ने खड़े होकर देश के पूर्व राष्ट्रपति जी को सलामी दी थी। उस समय उनकी उम्र 96 वर्ष के करीब थी। क्या जज्बा था।

भारत सरकार ने अर्जन सिंह को सम्मानित करने के लिए वर्ष 2016 को पश्चिम बंगाल के दुर्गपुर स्थित पन्नागढ़ वायुसेना ठिकाने का नाम अर्जन सिंह वायुसेना केंद्र रखा गया।
1965 मे अर्जन सिंह पद्म विभूषण से सम्मानित भी किया गया था।

अर्जन सिंह जी 1965 युद्ध के हमारे नायक थे।वो देश के लिये एक महान प्रेरणा है। हमारे गौरव है देश के असली हीरो । सोशल सेल्फी आर्टिकल ब्लॉग उनको नमन करता है। और उनकी जीवनी को आप सभी के समक्ष रख के मार्शल अर्जन सिंह जी को  श्रधंजलि  देता है।अर्जन सिंह जी हम सभी आप को सल्यूट करते है।


जय हिंद
जय भारतीय 
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