क्या अब यूट्यूब चैनल पर आने वाले पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है?
पत्रकार पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज,यानी लोकतंत्र की हत्या
प्रवेश रवि (Times of जनता): आप लोग न्यूज़ चैनलों को ज्यादा महत्व देते होंगे क्योंकि यूट्यूब चैनलो को देखना शायद ज्यादा पसंद नहीं करते होंगे. सचाई की बात करें तो आज के समय में सच्चाई यूट्यूब चैनलो पर देखने को मिल रही हैं.क्योंकि अधिकतर न्यूज़ चैनल सरकार के पक्ष में दिखाई देते हैं और जो बचा है वह एनडीटीवी चैनल.. इसके अलावा अगर कोई भी चैनल है तो वह केवल सरकार के गुणगान करता रहता है जैसा कि आप सभी देखते भी हैं.
कुछ पत्रकार ऐसे हैं जो नौकरी करते वक्त हटाए गए थे.हटाए इसलिए गए थे क्योंकि उन चैनल के मालिकों को भारी नुकसान हो रहा था.वह पत्रकार सरकार से सवाल पूछते थे और सरकार को यह बात बिल्कुल भी पसंद नही थी.इनमें अभिसार शर्मा, पुण्य प्रसून बाजपाई,अजीत अंजुम जैसे नामी दिग्गज पत्रकार शामिल है.जिन्हें सवाल पूछने पर कुछ अराजक शक्तियों के दबाव में आकर मालिकों ने नौकरी से निकाल दिया.
आज यह तीनों पत्रकार अपना यूट्यूब चैनल चलाते हैं और सच्चाई सबके सामने रखते हैं. इनमें एक पत्रकार जो हैं विनोद दुआ. यह इन सभी से वरिष्ठ है और पत्रकारिता जगत के एक खिलाड़ी माने जाते हैं. मीडिया हाउस में इन दिनों उन पत्रकारों को नौकरी में नहीं रखा जाता है जो लोग जनता की हक की बात करते हैं अगर कहीं बुरा हो रहा है तो सरकार को कोसते हैं जहां पर सरकार की नीतियों में कमी होती है उन को उजागर करते हैं.ऐसे पत्रकारों को नौकरी में नहीं रखा जाता है.
अब आप सोच रहे होंगे कि एनडीटीवी चैनल के रविश कुमार कैसे टिके हुए हैं. साधारण सी बात है हर इंसान एक जैसा नहीं होता.इसी तरह इंसानियत कहीं ना कहीं तो दिखती है.एनडीटीवी चैनल अपनी अलग पत्रकारिता के लिए जाना जाता है. आज मीडिया के छात्रों को एनडीटीवी चैनल का उदाहरण इसलिए दिया जाता है क्योंकि यह चैनल वास्तव में जो पत्रकारिता का असली रूप है.पत्रकारिता का जो धर्म है उस रास्ते पर चल रहा है.इस वजह से पत्रकारिता के छात्रों को बेहतरीन पत्रकारिता करने के लिए एनडीटीवी चैनल का उदाहरण दिया जाता है.
विरोधी लगता है जबकि सभी को यह समझना चाहिए. सरकार की नीतियों के खिलाफ अगर आवाज नहीं उठाई जाएगी तो आने वाले समय में आम जनों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. फिलहाल तो करना ही पड़ रहा है.
इन दिनों देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना आम बात हो चुकी है मगर पत्रकार के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना यह आम बात बिल्कुल भी नहीं हो सकती क्योंकि पत्रकार की आवाज को दबाने के लिए देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करवाना हमारे लोकतंत्र के लिए घातक सिद्ध हो सकता है जो कि पत्रकार पूरे देश की आवाज होता है जनता को सरकार से ज्यादा पत्रकारों पर भरोसा होता है क्योंकि यह एक उम्मीद होती है जो जनता के मुद्दों को सरकार तक पहुंचाती है .वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ पत्रकारिता जगत के एक नामी पत्रकार है वह चैनल एचडब्ल्यू नेटवर्क के साथ जुड़े हैं और जिस तरह की पत्रकारिता के लिए टीवी चैनलों पर जाने जाते थे. उसी तरह की पत्रकारिता यूट्यूब चैनल में भी कर रहे हैं मगर उनकी सच्चाई कुछ लोगों को रास नहीं आ रही है.पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ बीजेपी नेताओं द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया गया है मगर हैरानी वाली बात यह है कि एक बीजेपी नेता उन पर संप्रदायिक तनाव और लोगों में अशांति फैलाने को लेकर मुकदमा दर्ज करवाया है. दूसरा बीजेपी नेता उन पर इन्हीं सभी मामलों को लेकर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करवा चुका है. एक मामला दिल्ली में दर्ज है और दूसरा हिमाचल प्रदेश में.. दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है और हिमाचल में बीजेपी की सरकार है.
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता नवीन कुमार ने दिल्ली क्राइम ब्रांच में दुआ के खिलाफ शिकायत की थी. नवीन कुमार ने अपनी शिकायत में कहा है की विनोद दुआ ने अपने ‘‘द विनोद दुआ शो’’ के माध्यम से ‘‘फर्जी सूचनाएं फैला’’ रहे हैं. नवीन के मुताबिक, उनकी टिप्पणियां अपमानजनक थीं। इसके अलावा उन्होंने दुआ पर सीएए और एनआरसी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों और दंगों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कपिल मिश्रा और गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया। पांच पन्नों की इस एफआईआर में दुआ के खिलाफ आईपीसी की धारा 290, 505, और 505(2) के तहत केस दर्ज हैं।
हिमाचल प्रदेश में भाजपा के एक स्थानीय नेता अजय श्याम ने पत्रकार विनोद दुआ पर देशद्रोह का आरोप लगाया है. वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ दिल्ली में इस वर्ष की शुरुआत में हुए सांप्रदायिक दंगों को लेकर यू-ट्यूब पर शो करने के लिए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. शिकायत के मुताबिक उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर वोट हासिल करने के लिए ‘मौतों एवं आतंकवादी हमले' का इस्तेमाल करने के आरोप लगाये.
भाजपा के अजय श्याम की शिकायत पर उनके खिलाफ धारा 124 ए (देशद्रोह), 268 (सार्वजनिक गड़बड़ी), 501 (ऐसी सामग्री प्रकाशित करना जिससे मानहानि हो) और 505 (सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने वाले बयान देना) के तहत मामला दर्ज किया गया. दुआ को बृहस्पतिवार को एक नोटिस भेजकर शिमला पुलिस के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया.
उन्हें नोटिस देने के लिए हिमालच प्रदेश के पुलिसकर्मी शुक्रवार को दिल्ली उनके घर पर पहुंचे. राज्य पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि नोटिस के जवाब में दुआ ने कहा कि स्वास्थ्य, उम्र और कोविड-19 प्रोटोकॉल के कारण वह कुमारसैन थाने नहीं आ सकते. पुलिस अधीक्षक कौशल शर्मा ने कहा कि बहरहाल, वह ई-मेल या किसी अन्य ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से जांच में शामिल होने पर सहमत हो गये हैं.
भाजपा नेता अजय श्याम ने शिकायत दी कि दुआ ने 30 मार्च को 15 मिनट के यू-ट्यूब शो में कई विचित्र आरोप लगाये. हिमाचल में दर्ज शिकायत के खिलाफ दुआ ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है. उसी पर रविवार को सुनवाई होगी.दुआ के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने आपत्ति दर्ज कराई थी और कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप उनके बोलने की आज़ादी के संवैधानिक अधिकार पर हमला हैं.
ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में अभिसार शर्मा पुण्य प्रसून बाजपाई,अजीत अंजुम or रवीश कुमार पर भी मुकदमे दर्ज हो सकते हैं. क्योंकि यह सभी पत्रकार सरकार की गलत नीतियों को उजागर करते रहते हैं टाइम्स ऑफ जनता इन पत्रकारों को सचेत कर रहा है.अगर ऐसा होता है तो यह देश के लोकतंत्र के लिए बहुत ही खतरनाक सिद्ध होगा. क्योंकि आवाज उठाना और सरकार की बुराई करना किसी भी तरह से देशद्रोह नहीं हो सकता है. विनोद दुआ पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होने के बाद इन पत्रकारों पर भी देशद्रोह के मुकदमे दर्ज हो सकते हैं.
यहां पर इस बात को समझना बहुत जरूरी है.आखिर देशद्रोह है क्या और किन परिस्थितियों में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होता है शायद मुकदमा लिखवाने वाले और लिखने वाले को इस बात का नहीं पता होगा की देशद्रोह का मुकदमा लिखने की परिस्थितिया कौन सी होती है.
भारतीय कानून संहिता (आईपीसी) की धारा 124A में देशद्रोह की दी हुई परिभाषा के मुताबिक, अगर कोई भी व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है, तो उसे आजीवन कारावास या तीन साल की सजा हो सकती है.
कहां से आया नियम :
देशद्रोह पर कोई भी कानून 1859 तक नहीं था. इसे 1860 में बनाया गया और फिर 1870 में इसे आईपीसी में शामिल कर दिया गया.
इन पर हुआ है लागू:
1. 1870 में बने इस कानून का इस्तेमाल ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी के खिलाफ वीकली जनरल में 'यंग इंडिया' नाम से आर्टिकल लिखे जाने की वजह से किया था. यह लेख ब्रिटिश सरकार के खिलाफ लिखा गया था.
2. बिहार के रहने वाले केदारनाथ सिंह पर 1962 में राज्य सरकार ने एक भाषण के मामले में देशद्रोह के मामले में केस दर्ज किया था, जिस पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी. केदारनाथ सिंह के केस पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की एक बेंच ने भी आदेश दिया था. इस आदेश में कहा गया था, 'देशद्रोही भाषणों और अभिव्यक्ति को सिर्फ तभी दंडित किया जा सकता है, जब उसकी वजह से किसी तरह की हिंसा, असंतोष या फिर सामाजिक असंतुष्टिकरण बढ़े.'
सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना है कि अगर हिंसा होती है या इसे
सामाजिक और असंतोष बढ़ता है तभी देशद्रोह होता है.केवल बीजेपी के नेता मुकदमा लिखवा रहे हैं तो इसका मतलब साफ है कि वह अपने निजी लाभ के लिए मुकदमा लिखवा रहे हैं. सिर्फ उन को ठेस पहुंचने का मतलब यह नहीं कि 130 करोड़ बासीयों को विनोद दुआ के शो से परेशानी हो रही है. बीजेपी के नेता अगर मुकदमा दर्ज करवाते हैं यह सारा राजनीति और निजी स्वार्थ से प्रेरित है बीजेपी के नेताओं द्वारा अगर मुकदमा दर्ज कराया जाता है.तो टाइम आफ जनता की अपील है कि पुलिस बीजेपी नेताओं द्वारा पत्रकारों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज ना करें..नहीं तो आने वाले समय में लोकतंत्र जिंदा नहीं बचेगा.पत्रकारों के लिए आवाज उठाना बेहद मुश्किल हो जाएगा. लोगों का पुलिस पर से विश्वास उठ जाएगा. लोगों को लगेगा कि पुलिस सरकार की कठपुतली बन चुकी है. विनोद दुआ पर देशद्रोह का केस दर्ज होने को लेकर टाइम्स आफ जनता कड़ी निंदा करता है और उम्मीद करता है कि सभी पत्रकार एकजुट होकर विनोद दुआ का पूरा साथ देंगे और सरकार का विरोध जारी रखेंगे.


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